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हाईकोर्ट से 166 आदिवासी महिला-पुरुषों को बड़ी राहत, 66 करोड़ रुपये के कथित वन क्षति प्रकरण में मिली अग्रिम जमानत
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हाईकोर्ट से 166 आदिवासी महिला-पुरुषों को बड़ी राहत, 66 करोड़ रुपये के कथित वन क्षति प्रकरण में मिली अग्रिम जमानत

 

हाईकोर्ट अधिवक्ता सी.एस.चौहान

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने धमतरी जिले के उदंती टाइगर रिजर्व से जुड़े लगभग 66 करोड़ रुपये के कथित वन क्षति प्रकरण में 166 आदिवासी महिला एवं पुरुषों को अग्रिम जमानत प्रदान करते हुए महत्वपूर्ण राहत दी है। एक ही प्रकरण में इतनी बड़ी संख्या में आरोपियों को अग्रिम जमानत मिलने को कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, उदंती टाइगर रिजर्व क्षेत्र में कथित रूप से साल एवं अन्य प्रजातियों के वृक्षों की कटाई, वन भूमि पर अतिक्रमण तथा लकड़ी के अवैध विक्रय से शासन को लगभग 66 करोड़ रुपये की क्षति होने का आरोप है। इस संबंध में भारतीय वन अधिनियम एवं वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के तहत 166 ग्रामीणों के विरुद्ध अपराध दर्ज किया गया। आरोपियों में अधिकांश आदिवासी समुदाय के महिला एवं पुरुष हैं, जिनमें बड़ी संख्या बुजुर्गों की भी बताई गई है।

बताया गया कि सभी आरोपियों ने सर्वप्रथम अपर सत्र न्यायालय, धमतरी के समक्ष अग्रिम जमानत याचिका प्रस्तुत की थी, लेकिन वहां से राहत नहीं मिलने के बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के अधिवक्ता एवं छत्तीसगढ़ मानव अधिकार JJF सेवा संस्थान के प्रदेश अध्यक्ष अधिवक्ता सी.एस. चौहान के माध्यम से उच्च न्यायालय की शरण ली।

सुनवाई के दौरान अधिवक्ता सी.एस. चौहान ने न्यायालय के समक्ष विस्तृत तथ्यात्मक एवं विधिक पक्ष रखते हुए कहा कि आरोपियों में बड़ी संख्या ऐसे बुजुर्ग आदिवासियों की है, जिनकी आयु एवं शारीरिक स्थिति को देखते हुए उन पर लगाए गए आरोपों का निष्पक्ष परीक्षण आवश्यक है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि अभियोजन पक्ष द्वारा कथित रूप से काटी गई लकड़ी अथवा घटना में प्रयुक्त किसी उपकरण की बरामदगी का उल्लेख नहीं किया गया है। साथ ही अभयारण्य क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था, घटनास्थल की परिस्थितियों तथा अन्य प्रासंगिक तथ्यों की ओर भी न्यायालय का ध्यान आकर्षित किया गया।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने एवं उपलब्ध अभिलेखों का अवलोकन करने के बाद माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने सभी 166 आरोपियों को अग्रिम जमानत प्रदान करने का आदेश दिया।

निर्णय के पश्चात छत्तीसगढ़ मानव अधिकार JJF सेवा संस्थान एवं संबंधित आदिवासी परिवारों ने न्यायालय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें भारतीय न्यायपालिका की निष्पक्ष एवं संवैधानिक न्याय व्यवस्था पर पूर्ण विश्वास है।

उल्लेखनीय है कि अग्रिम जमानत प्रदान किया जाना केवल गिरफ्तारी से विधिक संरक्षण प्रदान करता है। इससे आरोपों का अंतिम सत्यापन अथवा अभियुक्तों का दोषमुक्त होना सिद्ध नहीं होता। मामले का अंतिम निर्णय साक्ष्यों एवं सुनवाई के आधार पर संबंधित न्यायालय द्वारा किया जाएगा।

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