सीएम हेल्पलाइन की शिकायत जांच में सही पाई गई, ₹1.67 लाख की राशि आहरण के बावजूद तकनीकी प्राक्कलन के अनुसार राशन गोदाम का मरम्मत कार्य नहीं मिला
मुंगेली/पथरिया। ग्राम पंचायत जरेली और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर उठ रहे सवाल थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। कुछ समय पहले डीएमएफ मद से DAV स्कूल मरम्मत के नाम पर लाखों रुपये के कार्य को लेकर सवाल खड़े हुए थे। अब ग्राम पंचायत जरेली में राशन दुकान के मरम्मत कार्य के नाम पर राशि आहरण किए जाने का मामला सामने आया है।
मामला उस समय सामने आया जब ग्राम पंचायत जरेली के ग्रामीण नरौत्तम कुमार ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत क्रमांक CC2607000104004, दिनांक 18 जुलाई 2026 के माध्यम से शिकायतकर्ता ने राशन गोदाम की मरम्मत के नाम पर वित्तीय राशि में गड़बड़ी किए जाने का आरोप लगाया था।
शिकायत में करीब ₹2 लाख 21 हजार की राशि के गबन का आरोप लगाया गया था। मामले की जांच कराई गई, जिसके बाद जनपद पंचायत पथरिया के मुख्य कार्यपालन अधिकारी कार्यालय से जारी जांच रिपोर्ट में शिकायत को सही पाए जाने की बात सामने आई है।
₹1.68 लाख का था प्राक्कलन
जांच रिपोर्ट के अनुसार ग्राम पंचायत जरेली की राशन दुकान के मरम्मत कार्य के लिए ₹1,68,000 का प्राक्कलन तैयार किया गया था। वहीं ₹1,67,828 की राशि का एक ही बार आहरण कर व्यय किया गया।
लेकिन जांच के दौरान तकनीकी प्राक्कलन के अनुसार राशन दुकान का जीर्णोद्धार कार्य कराया जाना नहीं पाया गया। यानी दस्तावेजों में जिस कार्य के लिए राशि स्वीकृत और खर्च होना बताया गया, मौके पर जांच के दौरान वह कार्य नहीं मिला।
जांच के बाद पंचायत को नोटिस
शिकायत की जांच के बाद मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत पथरिया द्वारा ग्राम पंचायत जरेली की सरपंच देवकी सिंगरौल और पंचायत सचिव शत्रुहन प्रसाद साहू को नोटिस जारी किया गया है।
नोटिस में दोनों को मामले के संबंध में तीन दिवस के भीतर अधोहस्ताक्षरी के समक्ष स्वयं उपस्थित होकर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
साथ ही पत्र में स्पष्ट किया गया है कि यदि प्रस्तुत जवाब संतोषप्रद नहीं पाया जाता है तो नियमानुसार राशि की वसूली की कार्रवाई के लिए प्रकरण अनुविभागीय अधिकारी, राजस्व पथरिया को भेजा जाएगा।
सवाल यह कि जब काम नहीं हुआ तो राशि किस आधार पर खर्च हुई?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि जांच रिपोर्ट के अनुसार तकनीकी प्राक्कलन के मुताबिक राशन दुकान का जीर्णोद्धार कार्य कराया ही नहीं गया, तो फिर ₹1,67,828 की राशि किस आधार पर आहरित कर खर्च की गई?
🫵क्या कार्य के नाम पर बिल-वाउचर लगाए गए?
🫵क्या कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र जारी हुआ?
🫵क्या माप पुस्तिका यानी MB में कार्य दर्ज किया गया?
🫵और यदि कार्य वास्तव में नहीं हुआ तो राशि का भुगतान किसके सत्यापन और किस प्रक्रिया के तहत किया गया?
इन सवालों का जवाब जांच और संबंधित दस्तावेजों से ही स्पष्ट होगा।
🫵जरेली पंचायत में लगातार उठ रहे सवाल
गौरतलब है कि ग्राम पंचायत जरेली में वित्तीय कार्यों को लेकर इससे पहले भी सवाल उठ चुके हैं। डीएमएफ मद से DAV स्कूल मरम्मत के नाम पर किए गए कार्य को लेकर भी ग्रामीणों द्वारा आपत्ति और शिकायत सामने आई थी।
अब राशन दुकान के मरम्मत कार्य के नाम पर राशि खर्च किए जाने के बावजूद जांच में कार्य नहीं मिलने का मामला सामने आने के बाद पंचायत की वित्तीय कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है।
फिलहाल जनपद पंचायत पथरिया द्वारा सरपंच और पंचायत सचिव से स्पष्टीकरण मांगा गया है। अब देखना होगा कि उनका जवाब क्या आता है और क्या इस मामले में वास्तव में राशि की वसूली तथा जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध आगे की कार्रवाई होती है।
🫵अब सवाल सिर्फ ₹1.67 लाख की राशि का नहीं, बल्कि यह है कि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज कार्य और जमीन पर हुए वास्तविक कार्य के बीच आखिर इतना बड़ा अंतर कैसे पैदा हुआ?



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