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सरकारी जमीन पर कथित अवैध कब्जे और स्कूल संचालन का मामला, CM हेल्पलाइन में शिकायत के बाद भी कार्रवाई शून्य
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सरकारी जमीन पर कथित अवैध कब्जे और स्कूल संचालन का मामला, CM हेल्पलाइन में शिकायत के बाद भी कार्रवाई शून्य

सरकारी जमीन पर कथित अवैध कब्जे और स्कूल संचालन का मामला, CM हेल्पलाइन में शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं; बारिश में तालाब-नहर के बीच बच्चों की सुरक्षा पर सवाल


बेदखली आदेश के बावजूद कार्रवाई में देरी, बारिश का हवाला देकर टाली गई कार्रवाई; तालाब, सड़क और नहर के बीच बच्चों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

सरकारी भूमि पर कथित अवैध कब्जे और उसी भवन में स्कूल संचालन का मामला अब प्रशासनिक कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। मामले को लेकर स्थानीय ग्रामीणों द्वारा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), कलेक्टर जनदर्शन के साथ-साथ CM हेल्पलाइन में भी शिकायत की गई। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत के बावजूद मामले का प्रभावी निराकरण नहीं हुआ और स्थानीय अधिकारियों ने बारिश के मौसम का हवाला देते हुए कार्रवाई बरसात के बाद करने की बात कहकर शिकायत का निराकरण कर दिया।

ग्रामीणों के अनुसार, राजस्व जांच में सरकारी भूमि पर कब्जे का मामला सामने आने के बाद बेदखली आदेश भी जारी किया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद संबंधित निर्माण को हटाकर सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराने की कार्रवाई अब तक नहीं की गई है।

CM हेल्पलाइन भी रही बेअसर

ग्रामीणों का कहना है कि जब स्थानीय स्तर पर शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने मामले को CM हेल्पलाइन तक पहुंचाया। शिकायत में सरकारी भूमि पर कथित अवैध कब्जे, बेदखली आदेश के पालन में देरी और उसी भवन में बच्चों की पढ़ाई कराए जाने का मुद्दा उठाया गया था।

आरोप है कि स्थानीय अधिकारियों द्वारा बारिश का हवाला देते हुए बरसात समाप्त होने के बाद कार्रवाई करने की बात कही गई और इसी आधार पर शिकायत का निराकरण कर दिया गया। ग्रामीणों का सवाल है कि यदि कार्रवाई आवश्यक है तो उसे केवल मौसम का हवाला देकर टालना कितना उचित है?

बारिश में ही सबसे ज्यादा खतरा, फिर कार्रवाई क्यों टाली?

मामले का सबसे गंभीर पहलू बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा बताया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, जिस कथित अवैध स्कूल भवन में बच्चों को बैठाकर पढ़ाया जा रहा है, उसके पीछे तालाब, सामने मुख्य मार्ग और बगल में नहर है। बारिश के मौसम में तालाब और नहर में पानी बढ़ने तथा आसपास जलभराव की स्थिति बनने से बच्चों के लिए खतरा और बढ़ सकता है।

ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर प्रशासन बारिश के कारण कार्रवाई टालने की बात कर रहा है, जबकि दूसरी ओर बारिश का मौसम ही वह समय है, जब उक्त स्थान पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर सबसे ज्यादा सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। ऐसे में मामले को बरसात के बाद तक टालना समझ से परे है।

जर्जर स्कूल भवन के कारण वैकल्पिक व्यवस्था का तर्क

तहसीलदार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि शासकीय स्कूल का भवन जर्जर होने के कारण फिलहाल बच्चों को उक्त भवन में बैठाकर पढ़ाई कराई जा रही है। प्रशासन का कहना है कि वैकल्पिक भवन की व्यवस्था होते ही संबंधित निर्माण को हटाने की कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि यदि भवन वास्तव में अवैध है और उसके खिलाफ बेदखली आदेश जारी हो चुका है, तो बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पहले वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए, न कि कार्रवाई को अनिश्चित समय तक टालना।

शिक्षा विभाग को भी जानकारी होने का दावा

ग्रामीणों का कहना है कि पूरे मामले की जानकारी विकासखंड शिक्षा अधिकारी और जिला शिक्षा अधिकारी को भी है। उनका कहना है कि संबंधित अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद अभी तक ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। अधिकारियों का कहना है कि लिखित शिकायत मिलने पर मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल

मामले में अब कई सवाल सामने आ रहे हैं—जब राजस्व स्तर पर जांच हो चुकी है और बेदखली आदेश जारी होने की बात कही जा रही है, तो उसका पालन क्यों नहीं कराया जा रहा? यदि वर्तमान भवन में बच्चों को पढ़ाना मजबूरी है तो सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था कब तक होगी? और यदि स्थान बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील है, तो बारिश के मौसम में कार्रवाई टालने का निर्णय किस आधार पर लिया गया?

ग्रामीणों का कहना है कि CM हेल्पलाइन तक शिकायत पहुंचाने के बाद भी यदि कार्रवाई के बजाय केवल समय बढ़ा दिया जाए, तो इससे शिकायत निवारण व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

अब लोगों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। सवाल यह है कि वैकल्पिक भवन की व्यवस्था कब तक की जाएगी, सरकारी भूमि को कब कब्जामुक्त कराया जाएगा और बच्चों की सुरक्षा को लेकर तत्काल क्या कदम उठाए जाएंगे।

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