👉अपने ही आदेश का पालन नहीं करा पा रहा प्रशासन,आमजनों का टूट रहा भरोसा
👉 सरकारी जमीन पर बने अवैध भवन में संचालित हो रहा स्कूल
👉 बेदखली आदेश के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई, तहसीलदार बोले– वैकल्पिक भवन मिलते ही तोड़ा जाएगा अवैध निर्माण
शिकायत के बाद जांच में सही पाया गया मामला
स्थानीय लोगों के अनुसार सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण की शिकायत राजस्व विभाग से की गई थी। जांच में यह पाया गया कि संबंधित भवन सरकारी भूमि पर बिना अनुमति निर्मित है। इसके बाद सक्षम अधिकारी द्वारा बेदखली आदेश भी जारी किया गया था।
ग्रामीणों का कहना है कि आदेश जारी होने के बाद उम्मीद थी कि प्रशासन जल्द सरकारी जमीन को कब्जामुक्त कराएगा, लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई।
अधिकारी के स्थानांतरण के बाद ठंडे बस्ते में गया मामला
बताया जाता है कि बेदखली आदेश जारी करने वाले अधिकारी का स्थानांतरण हो गया। इसके बाद नए अधिकारी के आने के बावजूद आदेश का पालन नहीं कराया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि मामले में लगातार टालमटोल की जा रही है।
एसडीएम तक पहुंची शिकायत, फिर भी कार्रवाई नहीं
स्थानीय स्तर पर कार्रवाई नहीं होने पर शिकायत अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) को भी दी गई। एसडीएम द्वारा जांच टीम गठित कर मौके का निरीक्षण कराया गया, लेकिन बताया जाता है कि जांच रिपोर्ट में पहले से जारी बेदखली आदेश का उल्लेख करने के अलावा कोई नई कार्रवाई नहीं हुई।
तहसीलदार ने बताया क्यों नहीं हो रही कार्रवाई
इस मामले में पथरिया तहसीलदार ने बताया कि संबंधित गांव का शासकीय स्कूल भवन वर्तमान में जर्जर स्थिति में है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसलिए फिलहाल शासकीय स्कूल के विद्यार्थियों को उसी भवन में बैठाकर पढ़ाई कराई जा रही है, जिस भवन को लेकर अवैध निर्माण का मामला सामने आया है।
उन्होंने कहा कि जैसे ही शासकीय स्कूल के लिए सुरक्षित एवं वैकल्पिक भवन की व्यवस्था हो जाएगी, उसके बाद नियमानुसार उक्त अवैध भवन को हटाने (तोड़ने) की कार्रवाई की जाएगी।
फिर भी उठ रहे कई सवाल
तहसीलदार के इस बयान के बावजूद कई सवाल बने हुए हैं। यदि संबंधित भवन सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण है और उसके विरुद्ध बेदखली आदेश पहले ही जारी हो चुका है, तो ऐसे भवन में शासकीय स्कूल का संचालन किन परिस्थितियों में किया जा रहा है। साथ ही बच्चों की सुरक्षा और भवन की वैधता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
सामने नाला, बरसात में बढ़ सकता है खतरा
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस भवन में बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं, उसके ठीक सामने एक नाला है। बरसात के दौरान इसमें तेज बहाव रहता है, जिससे स्कूल आने-जाने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है।
शिक्षा विभाग को भी है जानकारी
ग्रामीणों का कहना है कि इस पूरे मामले की जानकारी विकासखंड शिक्षा अधिकारी और जिला शिक्षा अधिकारी को भी है। अधिकारियों का कहना है कि लिखित शिकायत मिलने पर जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
नियम क्या कहते हैं
राजस्व नियमों के अनुसार सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा पाए जाने पर संबंधित निर्माण हटाकर भूमि को कब्जामुक्त कराया जा सकता है। वहीं निजी स्कूल संचालन के लिए भवन, भूमि और सुरक्षा संबंधी सभी मानकों का पालन आवश्यक होता है।
प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि जब जांच में मामला सही पाया जा चुका है और बेदखली आदेश भी जारी हो चुका है, तो उसके पालन में इतनी देरी क्यों हो रही है। उनका कहना है कि आदेश केवल कागजों तक सीमित रह जाने से लोगों का प्रशासन पर भरोसा कमजोर हो रहा है।
कलेक्टर जनदर्शन में भी हुई शिकायत, फिर भी कार्रवाई शून्य
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि मामले की शिकायत अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) के साथ-साथ कलेक्टर जनदर्शन में भी की जा चुकी है। शिकायत में सरकारी भूमि पर हुए कथित अवैध कब्जे, जारी बेदखली आदेश का पालन नहीं होने तथा उसी भवन में स्कूल संचालन का मुद्दा उठाया गया था। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत के बाद भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उनका कहना है कि राजस्व विभाग द्वारा बेदखली आदेश जारी किए जाने के बावजूद न तो सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराया गया और न ही संबंधित अवैध निर्माण हटाया गया। इससे प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं।
एक ओर प्रशासन का कहना है कि जर्जर शासकीय स्कूल भवन के कारण फिलहाल बच्चों को उक्त भवन में बैठाकर पढ़ाई कराई जा रही है और वैकल्पिक व्यवस्था होते ही अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई की जाएगी। वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों का कहना है कि एसडीएम से लेकर कलेक्टर जनदर्शन तक शिकायत करने के बावजूद आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन बेदखली आदेश का पालन कब सुनिश्चित करता है और सरकारी भूमि को कब कब्जामुक्त कराया जाता है।
सरकारी जमीन पर कथित अवैध निर्माण, उसी भवन में संचालित शासकीय स्कूल, पहले से जारी बेदखली आदेश और कार्रवाई में देरी—इन सभी पहलुओं ने इस मामले को गंभीर बना दिया है। तहसीलदार ने स्पष्ट किया है कि जर्जर शासकीय स्कूल भवन के कारण फिलहाल बच्चों को उक्त भवन में बैठाया जा रहा है तथा वैकल्पिक व्यवस्था होते ही अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई की जाएगी। अब देखना होगा कि प्रशासन वैकल्पिक भवन की व्यवस्था कब तक करता है और बेदखली आदेश का पालन कब तक सुनिश्चित होता है।


%202025.jpg%20(1).jpeg)












0 टिप्पणियाँ