👉 सामने नाला होने से बच्चों की सुरक्षा पर भी खतरा
मुंगेली। जिले में प्रशासनिक व्यवस्था और सरकारी आदेशों के पालन को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर बनाए गए भवन में निजी स्कूल का संचालन किया जा रहा है, जबकि संबंधित विभाग द्वारा पहले ही उस निर्माण को लेकर बेदखली आदेश जारी किया जा चुका है। इसके बावजूद अब तक न तो उस आदेश का पालन कराया गया और न ही किसी प्रकार की ठोस प्रशासनिक कार्रवाई की गई।
ये पूरा मामला मुंगेली जिले के विकासखण्ड पथरिया अंतर्गत ग्राम कंचनपुर के आश्रित ग्राम टोनहीचुवा का बताया जा रहा है। जहां एक निजी स्कूल संचालक पर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर भवन निर्माण कराने का आरोप है। इस पूरे मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और जिम्मेदारी पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
शिकायत के बाद जांच में सही पाया गया मामला
स्थानीय लोगों के अनुसार जब सरकारी जमीन पर भवन निर्माण की जानकारी सामने आई तो इसकी शिकायत संबंधित अधिकारियों से की गई। शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच कराई गई।
बताया जाता है कि जांच में यह पाया गया कि जिस जमीन पर भवन बनाया गया है वह सरकारी भूमि है और उस पर बिना अनुमति निर्माण कराया गया है। जांच के आधार पर संबंधित अधिकारी द्वारा बेदखली आदेश जारी किया गया।
बेदखली आदेश जारी होने के बाद उम्मीद की जा रही थी कि प्रशासन जल्द ही कार्रवाई करते हुए सरकारी जमीन को मुक्त कराएगा, लेकिन इसके बाद घटनाक्रम ने अलग ही मोड़ ले लिया।
अधिकारी के स्थानांतरण के बाद ठंडे बस्ते में गया मामला
जानकारी के अनुसार जिस अधिकारी ने बेदखली आदेश जारी किया था उनका स्थानांतरण हो गया। इसके बाद नए अधिकारी की पदस्थापना हुई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नए अधिकारी को पूरे मामले से अवगत कराया गया, लेकिन इसके बावजूद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाई। आरोप है कि मामले में लगातार टालमटोल किया जा रहा है और बेदखली आदेश का पालन नहीं कराया जा रहा।
अनुविभागीय अधिकारी को भी दी गई शिकायत
जब स्थानीय स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई तो इस मामले की लिखित शिकायत अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) के समक्ष भी की गई।
शिकायत मिलने के बाद अनुविभागीय अधिकारी द्वारा जांच के लिए एक टीम गठित की गई। टीम ने मौके पर जाकर स्थिति का निरीक्षण किया।
लेकिन बताया जा रहा है कि जांच टीम ने पहले से जारी बेदखली आदेश का हवाला देते हुए मामले को आगे बढ़ाने के बजाय उसी आधार पर रिपोर्ट तैयार कर दी। इसके बाद भी कोई ठोस प्रशासनिक कार्रवाई सामने नहीं आई।
बार-बार बेदखली आदेश का हवाला
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि अब अनुविभागीय अधिकारी द्वारा भी बार-बार उसी बेदखली आदेश का हवाला दिया जा रहा है, लेकिन उस आदेश को जमीन पर लागू कराने के लिए कोई कदम नहीं उठाया जा रहा।
यानी कागजों में आदेश मौजूद है, लेकिन वास्तविकता में उसका पालन नहीं हो रहा।
अवैध भवन में संचालित हो रहा स्कूल
सबसे गंभीर पहलू यह बताया जा रहा है कि जिस भवन को लेकर विवाद है और जिस पर अवैध कब्जे का आरोप है, उसी भवन में फिलहाल एक निजी स्कूल का संचालन किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि स्कूल में नियमित रूप से बच्चों की पढ़ाई भी हो रही है और रोजाना कई छात्र-छात्राएं वहां पहुंचते हैं।
ऐसे में सवाल उठता है कि जब जमीन को लेकर विवाद और बेदखली आदेश मौजूद है तो ऐसे भवन में स्कूल संचालन की अनुमति आखिर किस आधार पर दी गई।
शिक्षा विभाग को भी है जानकारी
बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले की जानकारी विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी और जिला शिक्षा अधिकारी को भी है।
जब इस संबंध में शिक्षा विभाग के अधिकारियों से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि यदि लिखित शिकायत प्राप्त होती है तो मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे गंभीर मामलों में संबंधित अधिकारियों को स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करनी चाहिए।
अवैध भवन के सामने नाला, बरसात में बढ़ सकता है खतरा
इस पूरे मामले का एक और गंभीर पहलू सामने आ रहा है। जिस भवन में स्कूल संचालित होने की बात कही जा रही है, उसके ठीक सामने एक नाला भी मौजूद है।
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| भवन के सामने नाला जिसे पाटा जा रहा |
स्थानीय लोगों के अनुसार बरसात के दिनों में आसपास के खेतों का बरसाती पानी इसी नाले में भर जाता है और पानी का स्तर काफी बढ़ जाता है। कई बार पानी तेजी से बहता भी है।
ऐसी स्थिति में स्कूल आने-जाने वाले बच्चों के लिए यह जगह बेहद जोखिम भरी हो सकती है। छोटे बच्चों को नाले के पास से होकर गुजरना पड़ता है और यदि बरसात के दौरान पानी ज्यादा हो जाए तो किसी भी समय अप्रिय घटना होने की आशंका बनी रहती है।
अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। यदि स्कूल परिसर के आसपास इस प्रकार का खतरा मौजूद है तो प्रशासन और शिक्षा विभाग को इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
नियम और कानून क्या कहते हैं
ऐसे मामलों में कई प्रकार के नियम और कानून लागू होते हैं।
राजस्व नियम
सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा होने की स्थिति में राजस्व विभाग को अधिकार होता है कि वह कब्जा हटाकर जमीन को मुक्त कराए। इसके लिए बेदखली आदेश जारी किया जाता है और आवश्यकता पड़ने पर प्रशासनिक बल का भी उपयोग किया जा सकता है।
स्कूल मान्यता के नियम
किसी भी निजी स्कूल को संचालित करने के लिए शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त करना आवश्यक होता है। मान्यता के लिए भवन, भूमि और सुरक्षा से जुड़े कई नियमों का पालन करना जरूरी होता है।
यदि स्कूल जिस भवन में संचालित हो रहा है वह कानूनी रूप से वैध नहीं है तो उसकी मान्यता पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।
बच्चों की सुरक्षा
स्कूल भवन और उसके आसपास का वातावरण बच्चों के लिए सुरक्षित होना चाहिए। यदि भवन विवादित हो या उसके आसपास जोखिम की स्थिति हो तो यह बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बन जाता है।
प्रशासनिक निष्क्रियता पर उठ रहे सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल प्रशासनिक निष्क्रियता को लेकर उठ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब जांच में मामला सही पाया जा चुका है और बेदखली आदेश भी जारी हो चुका है तो उसका पालन क्यों नहीं कराया जा रहा।
यदि आदेश जारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं होती तो इससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
लोगों का प्रशासन से टूटता भरोसा
ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में आम लोगों का भरोसा प्रशासन से धीरे-धीरे कम होता जा रहा है।
जब शिकायत की जाती है, जांच होती है और आदेश भी जारी हो जाता है लेकिन जमीन पर कोई कार्रवाई नहीं दिखती तो लोगों को लगता है कि उनकी आवाज को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।
अब कलेक्टर जनदर्शन से उम्मीद
स्थानीय लोगों का कहना है कि अब इस पूरे मामले में उनकी आखिरी उम्मीद कलेक्टर जनदर्शन से है।
ग्रामीणों का कहना है कि वे इस मामले को कलेक्टर के समक्ष रखेंगे ताकि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो सके और यदि कहीं नियमों का उल्लंघन हुआ है तो उस पर उचित कार्रवाई की जा सके।
निष्कर्ष
सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा, उस पर बना भवन, उसी में संचालित हो रहा निजी स्कूल और सामने मौजूद नाला – यह पूरा मामला प्रशासनिक व्यवस्था और बच्चों की सुरक्षा दोनों से जुड़ा गंभीर विषय बन गया है।
एक ओर जहां बेदखली आदेश जारी होने की बात सामने आ रही है, वहीं दूसरी ओर उसका पालन नहीं होने से प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या सरकारी जमीन को मुक्त कराते हुए नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाती है या नहीं।
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