पंचायत पदाधिकारी सम्मेलन : सीएम Vishnu Deo Sai बोले—गांवों के सशक्त होने से विकसित भारत का सपना होगा साकार
राजधानी रायपुर में आयोजित इस सम्मेलन में प्रदेशभर से पंचायत प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत बनाना, ग्रामीण विकास योजनाओं की समीक्षा करना और जमीनी स्तर पर बेहतर प्रशासनिक समन्वय स्थापित करना था।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि उन्होंने स्वयं अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत पंचायत प्रतिनिधि के रूप में की थी। पंच और सरपंच के रूप में काम करने का अनुभव उन्हें गांवों की वास्तविक समस्याओं और जरूरतों को समझने में मददगार रहा। उन्होंने कहा कि पंचायत केवल प्रशासनिक इकाई नहीं, बल्कि लोकतंत्र की सबसे मजबूत नींव है। गांवों के विकास से ही प्रदेश और देश का विकास संभव है।
उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रियता से ही शासन की योजनाएं अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुंच सकती हैं। यदि पंचायत स्तर पर सही निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो, तो विकास कार्यों की गुणवत्ता भी बेहतर होगी और योजनाओं का लाभ समय पर लोगों तक पहुंचेगा।
मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने गांवों को स्वच्छ, स्वस्थ और सुंदर बनाने में पंचायतों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र केवल विकास का केंद्र नहीं, बल्कि देश की आत्मा हैं। यदि गांव मजबूत होंगे, तो भारत की विकास यात्रा और अधिक मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि आज देश के कई बड़े नेता पंचायत स्तर से ही अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू कर उच्च सदनों तक पहुंचे हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि पंचायत लोकतंत्र की सबसे मजबूत पाठशाला है।
सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री ने पंचायत प्रतिनिधियों से कहा कि वे पंचायतों में संचालित सभी विकास कार्यों की नियमित निगरानी करें। सड़क, पानी, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा और स्वच्छता जैसी मूलभूत सुविधाओं पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यदि पंचायत प्रतिनिधि सक्रिय रहेंगे, तो विकास कार्यों में पारदर्शिता बनी रहेगी और भ्रष्टाचार पर भी नियंत्रण संभव होगा।
मुख्यमंत्री ने Jal Jeevan Mission 2.0 का उल्लेख करते हुए कहा कि हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन का उद्देश्य केवल पाइपलाइन बिछाना नहीं, बल्कि हर घर तक नियमित और सुरक्षित पेयजल पहुंचाना है। पंचायतों को इस योजना की निगरानी में सक्रिय भूमिका निभानी होगी ताकि कोई भी गांव इससे वंचित न रहे।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि समयबद्धता और गुणवत्ता दोनों पर विशेष ध्यान देना होगा। अधूरे कार्य, लापरवाही और संसाधनों की बर्बादी को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। पंचायत प्रतिनिधियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि गांवों में चल रही योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि वास्तविक रूप से लोगों के जीवन में बदलाव लाएं।
मुख्यमंत्री ने “सुशासन तिहार” के आयोजन का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इसके माध्यम से प्रदेशभर में शिविर लगाए जाएंगे, जहां आमजन अपनी समस्याएं सीधे प्रशासन के सामने रख सकेंगे। यह पहल सरकार और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का प्रयास है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से अपील की कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में लोगों की समस्याओं की पहचान करें और समाधान की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाएं।
उन्होंने कहा कि सुशासन केवल योजनाओं की घोषणा से नहीं आता, बल्कि समय पर समाधान, जवाबदेही और संवेदनशील प्रशासन से आता है। पंचायत प्रतिनिधियों को इस प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बनना होगा। गांवों में यदि समस्याओं का समाधान स्थानीय स्तर पर हो जाए, तो लोगों का विश्वास शासन व्यवस्था में और मजबूत होगा।
सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लंबे समय से लंबित बिजली बिलों के भुगतान के लिए सरकार विशेष अवसर प्रदान कर रही है। इस योजना के तहत सरचार्ज पूरी तरह माफ किया गया है और अतिरिक्त रियायत का भी प्रावधान है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से कहा कि वे अधिक से अधिक ग्रामीणों को इस योजना का लाभ दिलाने के लिए जागरूक करें।
उन्होंने कहा कि बिजली केवल सुविधा नहीं, बल्कि विकास की आधारशिला है। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की उपलब्धता और बिल संबंधी समस्याओं का समाधान विकास की गति को तेज करेगा। पंचायतों को इसमें भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
राजस्व मंत्री Tank Ram Verma ने भी सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय के सिद्धांत पर काम कर रही है। अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाना ही सरकार का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार ग्रामीण विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन द्वारा संचालित विभिन्न नवाचारों की भी सराहना की। प्रोजेक्ट अजा के तहत बकरी पालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दो महिलाओं को ई-रिक्शा की चाबी सौंपी गई। यह पहल ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इसके साथ ही प्रोजेक्ट आरोग्यम के कटआउट और प्रोजेक्ट हैंडी के तहत शासन की योजनाओं की संक्षिप्त पुस्तक का विमोचन भी किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे नवाचार ग्रामीण विकास को नई दिशा देते हैं और प्रशासन को लोगों के और करीब लाते हैं।
सम्मेलन में सांसद Brijmohan Agrawal, राज्यसभा सांसद Laxmi Verma, विधायक Anuj Sharma, विधायक Indra Kumar Sahu, तेलघानी विकास बोर्ड के अध्यक्ष Jitendra Sahu, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष Mona Sen सहित त्रि-स्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
यह सम्मेलन केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं था, बल्कि गांवों के भविष्य, पंचायतों की भूमिका और विकसित भारत के संकल्प को मजबूत करने का मंच बना। मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश था कि गांवों के सशक्त हुए बिना विकसित भारत का सपना अधूरा रहेगा।
सरकार अब पंचायती राज संस्थाओं को केवल प्रशासनिक इकाई नहीं, बल्कि विकास की मुख्य धुरी मानकर आगे बढ़ रही है। आने वाले समय में पंचायत प्रतिनिधियों की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ने वाली है। यदि पंचायतें मजबूत होंगी, तो गांव मजबूत होंगे, और जब गांव मजबूत होंगे, तभी विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत का सपना साकार होगा।

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