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रायपुर: सोशल आडिट ने उजागर किया वीबीजीरामजी योजना का घोटाला

 


छत्तीसगढ़ में वीबीजीरामजी योजना के तहत चल रहे विकास कार्यों में सोशल आडिट ने गंभीर अनियमितताओं और वित्तीय गबन के मामलों को सामने लाया है। सोशल आडिट के दौरान कुल 18,664 मामले सामने आए, जिनमें 136 करोड़ 40 लाख रुपए का गड़बड़झाला उजागर हुआ।

सोशल आडिट के माध्यम से वित्तीय गबन, अनियमितताएं, प्रक्रियाओं के उल्लंघन और शिकायतों से जुड़ी कई खामियां उजागर हुईं। रिपोर्ट के अनुसार, गबन करने वालों से वसूली का प्रावधान मौजूद था, लेकिन अब तक केवल 20 लाख 13 हजार रुपए ही रिकवरी हो पाई है।

सोशल आडिट का महत्व

छत्तीसगढ़ की सामाजिक अंकेक्षण इकाई राज्यभर में चल रही जनकल्याणकारी योजनाओं का ऑडिट करती है। इसका मुख्य उद्देश्य योजना के कार्यान्वयन में पारदर्शिता लाना और अनियमितताओं को पकड़ना है।

प्रत्येक जिला और विकासखंड के लिए वार्षिक सामाजिक अंकेक्षण कैलेंडर तैयार किया जाता है। जिला कार्यक्रम समन्वयक और कलेक्टर सोशल आडिट दल को संबंधित दस्तावेज और अभिलेख उपलब्ध कराने के आदेश जारी करते हैं। इसके बाद दल में शामिल युवा, स्वयं सहायता समूह की महिलाएं और पूर्व प्रशिक्षित ग्रामीण सामाजिक अंकेक्षक चार दिन का प्रशिक्षण लेकर योजना का ऑडिट करते हैं।

इस प्रक्रिया से यह सुनिश्चित होता है कि योजना में किसी भी प्रकार की अनियमितता, गबन या प्रक्रियाओं का उल्लंघन न रह जाए।

वित्तीय गबन और अनियमितताओं की रिपोर्ट

2025-26 के दौरान छत्तीसगढ़ के 33 जिलों में 11,713 ग्राम पंचायतों में से लगभग 7,653 पंचायतों में सोशल आडिट किया गया।

  • वित्तीय गबन के 4,389 मामले सामने आए, जिनमें कुल 12 करोड़ 95 लाख रुपए का गड़बड़झाला था।

  • वित्तीय अनियमितताओं के 2,989 मामले सामने आए, जिनमें 108 करोड़ 83 लाख रुपए का गोलमाल हुआ।

  • प्रक्रियाओं के उल्लंघन के 9,740 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 11 करोड़ 89 लाख रुपए का नुकसान हुआ।

  • इसके अलावा 1,546 शिकायतें दर्ज की गई, जिनमें 31 लाख रुपए की अनियमितता शामिल थी।

कुल मिलाकर 136 करोड़ 40 लाख रुपए से अधिक का घोटाला उजागर हुआ।

रिकवरी की स्थिति और चुनौतियां

सोशल आडिट रिपोर्ट से पता चलता है कि वास्तविक रिकवरी बहुत कम रही। गबन के मामलों में केवल 693 मामलों में ही वसूली हुई, जिसकी कुल राशि 20 लाख 13 हजार रुपए थी।

विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल आडिट ने भले ही वित्तीय गड़बड़ियों को उजागर किया, लेकिन रिकवरी प्रक्रिया और प्रशासनिक कार्रवाई में गंभीर कमियां हैं।

सोशल आडिट से क्या संदेश मिलता है?

इस रिपोर्ट से साफ होता है कि ग्रामीण विकास योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही कितनी महत्वपूर्ण है। सोशल आडिट न केवल गबन पकड़ने में सहायक है, बल्कि ग्रामीणों को योजना में प्रत्यक्ष भागीदारी का अवसर भी देता है।

सोशल आडिट की वजह से अधिकारियों को यह मौका मिला कि वे वास्तविक समस्याओं और भ्रष्टाचार को समझें और सुधारात्मक कदम उठाएं।

समाज पर प्रभाव

वित्तीय गबन और अनियमितताओं के कारण ग्रामीण विकास कार्यों का लाभ सीधे लाभार्थियों तक नहीं पहुंचा। सोशल आडिट ने यह स्पष्ट कर दिया कि योजना के क्रियान्वयन में सिस्टम में निगरानी और सुधार की आवश्यकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल आडिट जैसे तंत्रों से भविष्य में विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकती है।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ में वीबीजीरामजी योजना की सोशल आडिट रिपोर्ट ने दिखाया कि

  • योजना में 136 करोड़ से अधिक की अनियमितताएं हैं।

  • रिकवरी बेहद कम है, केवल 20 लाख रुपए की राशि ही वसूली जा सकी।

  • प्रशासनिक सुधार और निगरानी के बिना योजना का प्रभाव सीमित रहेगा।

सोशल आडिट ने स्पष्ट किया कि जनभागीदारी और निगरानी के माध्यम से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सकता है, लेकिन इसे और मजबूत बनाना आवश्यक है।


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