एसबीआई मैनेजर का मास्टरमाइंड खेल: 2.78 करोड़ की धोखाधड़ी का 1290 पेज चालान पेश
रायपुर, 14 मार्च 2026:
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में 2.78 करोड़ रुपए के गबन मामले में एसीबी और ईओडब्लू ने शुक्रवार को तत्कालीन बैंक मैनेजर विजय कुमार अहके के खिलाफ 1290 पेज का चालान एसीबी-ईओडब्लू विशेष न्यायधीश की कोर्ट में पेश किया।
जांच के दौरान सामने आया कि यह धोखाधड़ी अगस्त 2024 से जून 2025 के बीच हुई थी। आरोपी बैंक मैनेजर ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए सरकारी धन को शातिराना तरीके से अपनी पत्नी के बैंक खाते में ट्रांसफर किया और नेट बैंकिंग के माध्यम से अपने निजी खाते में स्थानांतरित कर लिया।
कैसे हुआ धोखाधड़ी का खेल?
जांच में यह तथ्य सामने आया कि आरोपी बैंक मैनेजर ने बैंक के आंतरिक सिस्टम में हेरफेर कर निम्न रणनीतियाँ अपनाईं:
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क्यूटरचित लेनदेन तैयार करना:
बैंक के ब्रांच जनरल लेजर खाते से रकम निकालने के लिए क्यूटरचित लेनदेन बनाए गए। यह खाता सरकारी और बड़ी वित्तीय प्रविष्टियों के लिए उपयोग होता है। -
लेनदेन को छोटा रखना:
प्रत्येक ट्रांजेक्शन की राशि पांच लाख रुपए से कम रखी, ताकि हाई वैल्यू ट्रांसफर अलर्ट सिस्टम में यह संदिग्ध न दिखे। -
रोलओवर तकनीक:
हर 30 दिन में पुराने खाते की प्रविष्टियों को बदलकर नई प्रविष्टि में बदल दिया गया, जिससे शाखा अधिकारियों को वास्तविक स्थिति का पता नहीं चला।
कई ट्रांजेक्शन से राशि गबन
जांच के अनुसार, बैंक मैनेजर ने कुल 75 अलग-अलग ट्रांजेक्शन के माध्यम से रकम अपनी पत्नी के खाते में ट्रांसफर की।
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पत्नी के खाते में मोबाइल नंबर बैंक मैनेजर के मोबाइल से लिंक था।
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सभी ओटीपी सीधे मैनेजर के मोबाइल पर आते थे, जिससे उसे नेट बैंकिंग के जरिए राशि अपने अकाउंट में ट्रांसफर करना आसान हो गया।
गबन की राशि का निवेश
अधिकारी जांच में पाए कि आरोपी ने गबन की राशि को क्रिप्टोकरेंसी, कमोडिटी और आप्शन ट्रेडिंग में निवेश किया।
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इसके लिए ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग किया गया।
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राशि को तेजी से अलग-अलग निवेश माध्यमों में लगाया गया।
इस धोखाधड़ी से एसबीआई की SCAB शाखा को आर्थिक क्षति हुई।
जांच प्रक्रिया और सबूत
जांच एजेंसियों ने मामले में कई सबूत जुटाए:
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बैंक के मुख्य सर्वर से लेनदेन डेटा
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डिजिटल लॉग और बैंक स्टेटमेंट
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जब्त दस्तावेज
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गवाहों के बयान
राज्य सरकार के आदेश पर पूरे मामले की जांच एसीबी और ईओडब्लू को सौंपी गई।
बैंक मैनेजर के खिलाफ अदालत में कार्रवाई
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1290 पेज का चालान शुक्रवार को कोर्ट में पेश किया गया।
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आरोपी बैंक मैनेजर विजय कुमार अहके के खिलाफ गंभीर आरोप लगाकर मुकदमा चल रहा है।
विशेष ध्यान: यह मामला वित्तीय धोखाधड़ी का एक जटिल उदाहरण है, जिसमें बैंक सिस्टम के आंतरिक नियंत्रण और ऑनलाइन लेनदेन की सुरक्षा पर सवाल उठते हैं।
क्या यह मामला आम लोगों के लिए चेतावनी है?
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की धोखाधड़ी बैंकिंग प्रणाली और डिजिटल ट्रांजेक्शन में सतर्क रहने की आवश्यकता दर्शाती है।
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उच्च वैल्यू ट्रांजेक्शन में अलर्ट सिस्टम का महत्व
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नेट बैंकिंग और OTP के इस्तेमाल में सुरक्षा
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बैंक अधिकारियों की जवाबदेही और आंतरिक ऑडिट
निष्कर्ष
एसबीआई में 2.78 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का मामला यह दर्शाता है कि किसी भी बैंक सिस्टम में नियंत्रण और निगरानी का उल्लंघन गंभीर आर्थिक नुकसान पैदा कर सकता है।
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1290 पेज के चालान से मामले की गंभीरता और जटिलता सामने आई।
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आरोपी बैंक मैनेजर के शातिराना तरीकों से बैंक और जनता के विश्वास को झटका लगा।
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एसीबी और ईओडब्लू द्वारा समय पर कार्यवाही से न्याय की संभावना बढ़ी है।
यह मामला भविष्य में बैंकिंग धोखाधड़ी और वित्तीय सुरक्षा नियमों पर ध्यान केंद्रित करने की महत्वपूर्ण चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
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