आबकारी अफसर पर फर्जी जाति प्रमाणपत्र का आरोप, SC-ST आयोग ने मांगा जवाब
16 मार्च 2026/ बिलासपुर।
मध्यप्रदेश के आबकारी विभाग में पदस्थ अपर आयुक्त राजेश हेनरी पर फर्जी जाति प्रमाणपत्र बनवाकर नौकरी करने का गंभीर आरोप लगा है। शिकायत के अनुसार उन्होंने साल 1990-91 में बिलासपुर से अनुसूचित जनजाति (ST) का फर्जी प्रमाणपत्र बनवाया और उसी के आधार पर पिछले करीब 35 वर्षों से आबकारी विभाग में नौकरी कर रहे हैं।
इस मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग (SC-ST आयोग) ने संज्ञान लेते हुए बिलासपुर कलेक्टर और मध्यप्रदेश आबकारी विभाग के प्रमुख सचिव को नोटिस जारी किया है और 15 दिनों के भीतर जवाब मांगा है।
आरटीआई एक्टिविस्ट ने की शिकायत
इंदौर निवासी वकील और आरटीआई एक्टिविस्ट राजेंद्र गुप्ता ने इस मामले की शिकायत की है। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्वालियर के रहने वाले राजेश हेनरी ने आपराधिक षड्यंत्र के तहत फर्जी जाति प्रमाणपत्र तैयार करवाया और खुद को आदिवासी समुदाय का बताकर सरकारी नौकरी हासिल की।
शिकायत के अनुसार इस प्रमाणपत्र के आधार पर वे मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों में पदस्थ रहे और लंबे समय से नौकरी करते आ रहे हैं।
बिलासपुर तहसील के प्रमाणपत्र का किया इस्तेमाल
आरटीआई के जरिए जुटाई गई जानकारी के मुताबिक राजेश हेनरी ने बिलासपुर तहसील के सील और हस्ताक्षर वाले जाति प्रमाणपत्र का उपयोग किया।
लेकिन जब 1990-91 के रिकॉर्ड की तहसील कार्यालय के दायरा पंजी से जांच की गई, तो वहां उनके नाम से कोई प्रकरण दर्ज ही नहीं मिला। इससे प्रमाणपत्र की वैधता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
दो साल से लंबित है जांच
इस मामले में छत्तीसगढ़ की उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति ने राजेश हेनरी के अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र की जांच के लिए इसे जिला स्तरीय जाति छानबीन समिति को भेजा था।
हालांकि बताया जा रहा है कि यह जांच करीब दो वर्षों से लंबित है और अभी तक अंतिम रिपोर्ट सामने नहीं आई है।
दस्तावेज लेकर पेश होने के लिए नोटिस
आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त संजय चंदेल के अनुसार राजेश हेनरी को उनके जाति संबंधी सभी दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी किया गया था, लेकिन वे अब तक जांच समिति के सामने पेश नहीं हुए हैं।
आयोग ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट
मामला राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने के बाद राष्ट्रीय SC-ST आयोग ने इसे गंभीरता से लेते हुए बिलासपुर कलेक्टर और मध्यप्रदेश के आबकारी विभाग से पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने अधिकारियों को 15 दिनों के भीतर विस्तृत जानकारी देने के निर्देश दिए हैं।
अफसर ने टिप्पणी करने से किया इनकार
इस पूरे मामले में जब मीडिया ने आबकारी विभाग ग्वालियर में पदस्थ अपर आयुक्त राजेश हेनरी से उनका पक्ष जानना चाहा, तो उन्होंने इसे विभागीय मामला बताते हुए कोई भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया।
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