संयुक्त संचालक शिक्षा बिलासपुर के आदेश पर शिक्षक निलंबित,बिना सुनवाई कार्रवाई पर सवाल
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| प्रतिकात्मक फोटो |
रायपुर// विदित हो कि डॉ. सोमनाथ यादव, दिनांक 30 सितम्बर 2025 से पूर्व भारत स्काउट्स एवं गाइड्स, छत्तीसगढ़ के राज्य मुख्य आयुक्त के पद पर पदस्थ थे। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने संगठन के मूल उद्देश्यों एवं सिद्धांतों की अनदेखी करते हुए, छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों सहित मुंगेली जिले में भी अनुभवी एवं वरिष्ठ स्काउटर-गाइडरों की उपेक्षा की।
उनके द्वारा कथित रूप से अपने परिचितों, मित्रों एवं रिश्तेदारों को संगठन में महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त किया गया, जबकि इन व्यक्तियों का स्काउटिंग-गाइडिंग आंदोलन से कोई ठोस संबंध या अनुभव नहीं था। यह कृत्य संगठन की पारदर्शिता, योग्यता आधारित चयन प्रक्रिया तथा भारत स्काउट्स एवं गाइड्स के संविधान एवं नियमावली के विपरीत प्रतीत होता है।
इसके अतिरिक्त, डॉ. सोमनाथ यादव के कथित उपेक्षापूर्ण व्यवहार, अपमानजनक भाषा एवं सार्वजनिक रूप से वरिष्ठ स्काउटर-गाइडरों के सम्मान को ठेस पहुँचाने के कारण, लंबे समय से जुड़े समर्पित कार्यकर्ता संगठन से दूर होने लगे। परिणामस्वरूप, छत्तीसगढ़ सहित मुंगेली जिले में स्काउटिंग आंदोलन की स्थिति कमजोर एवं अव्यवस्थित होती चली गई।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, मुंगेली जिले के वरिष्ठ स्काउटर-गाइडर—श्री पीताम्बर मानिकपुरी, अमित गुप्ता, युगल राजपूत, रोहिणी ठाकुर, भूपेंद्र ठाकुर आदि—द्वारा वर्तमान स्कूल शिक्षा मंत्री (तत्कालीन पूर्व राज्य मुख्य आयुक्त) को लिखित शिकायत प्रस्तुत की गई।
शिकायत करने के उपरांत, इन स्काउटर-गाइडरों को कथित रूप से प्रताड़ित किया गया एवं संगठन से बाहर कर दिया गया, जो कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत (Principles of Natural Justice)—विशेषकर Audi Alteram Partem (दोनों पक्षों को सुनने का अधिकार)—का उल्लंघन है।
इतना ही नहीं, शिकायतकर्ताओं को अपशब्द कहे जाने एवं धमकी दिए जाने के आरोप भी सामने आए, जो कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 503 (आपराधिक धमकी) एवं 504 (जानबूझकर अपमान) के अंतर्गत विचारणीय हो सकता है।
बाद में, विभिन्न स्तरों पर प्राप्त शिकायतों के आधार पर छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जांच कराई गई। जांच उपरांत डॉ. सोमनाथ यादव को राज्य मुख्य आयुक्त पद से हटाकर श्री इंदरजीत खालसा को नियुक्त किया गया, जो यह दर्शाता है कि शिकायतों में प्रथम दृष्टया गंभीरता पाई गई।
इसके पश्चात, कथित रूप से द्वेषवश डॉ. सोमनाथ यादव द्वारा शिक्षक एवं वरिष्ठ स्काउटर श्री पीताम्बर दास मानिकपुरी के विरुद्ध उनके एक फेसबुक पोस्ट के आधार पर शिकायत की गई। उल्लेखनीय है कि उक्त पोस्ट में किसी व्यक्ति विशेष का नाम नहीं लिया गया था।
फिर भी, संयुक्त संचालक, शिक्षा संभाग बिलासपुर द्वारा बिना उचित जांच, बिना कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) और बिना पक्ष रखने का अवसर दिए सीधे निलंबन की कार्रवाई कर दी गई।
यह कार्रवाई निम्न आधारों पर सवालों के घेरे में आती है—
🔹 छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के प्रावधानों का उल्लंघन
🔹 निलंबन से पूर्व प्राथमिक जांच (Preliminary Inquiry) का अभाव
🔹 कर्मचारी को अपना पक्ष रखने का अवसर न देना (Violation of Natural Justice)
🔹 केवल सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई
अतः यह प्रश्न उठता है कि— 👉 क्या एक समर्पित, लोकप्रिय एवं वरिष्ठ शिक्षक को बिना ठोस आधार केवल दबाव या प्रतिशोध की भावना से निलंबित करना न्यायसंगत है?
👉 क्या शिक्षा विभाग निष्पक्ष जांच कर वास्तविकता सामने लाएगा?
अब यह देखना अत्यंत महत्वपूर्ण होगा कि— क्या पीताम्बर मानिकपुरी को न्याय मिलेगा या वे भी व्यवस्था की खामियों और दबाव की राजनीति का शिकार बनेंगे?



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