रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में मंगलवार को मनरेगा के मुद्दे पर जोरदार हंगामा देखने को मिला। कांग्रेस ने इस विषय पर स्थगन प्रस्ताव लाकर चर्चा की मांग की, लेकिन प्रस्ताव नामंजूर होने के बाद कांग्रेस विधायकों ने सदन की कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सदन में स्थगन प्रस्ताव पेश करते हुए मनरेगा के मुद्दे पर तत्काल चर्चा कराने की मांग की। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
अजय चंद्राकर का तंज
स्थगन प्रस्ताव पेश होते ही भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि कांग्रेस विधायक पहले ही सदन में नहीं रहने की बात कह चुके हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि विधानसभा कांग्रेस विधायकों की राजनीति का अड्डा नहीं है।
इस बयान के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई।
भूपेश बघेल ने दी चुनौती
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सत्ता पक्ष को चुनौती देते हुए कहा कि यदि सरकार में हिम्मत है तो स्थगन प्रस्ताव स्वीकार कर चर्चा कराए। उन्होंने कहा कि अगर प्रस्ताव स्वीकार होता है तो कांग्रेस विधायक सदन से बाहर नहीं जाएंगे।
इसी दौरान बघेल और अजय चंद्राकर के बीच तीखी बहस हुई और भारी हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी।
चरणदास महंत ने सरकार पर साधा निशाना
सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि कांग्रेस गरीबों और मजदूरों की बात उठा रही है, लेकिन सत्ता पक्ष इस मुद्दे पर चर्चा नहीं होने देना चाहता।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार गरीबों के मुद्दों पर चर्चा से बच रही है।
स्थगन नामंजूर होते ही बहिष्कार
स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा को लेकर सदन में एक बार फिर हंगामा शुरू हो गया। इसी बीच भाजपा विधायक राजेश मूणत ने कहा कि कांग्रेस को दो महीने बाद मनरेगा की याद आई है।
इसके बाद आसंदी ने विपक्ष के स्थगन प्रस्ताव को अग्राह्य कर दिया। प्रस्ताव नामंजूर होने के बाद नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सदन की कार्यवाही के बहिष्कार की घोषणा कर दी। इसके साथ ही कांग्रेस विधायक सदन से बाहर निकल गए।
💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥
👉 खबरें और भी है -
🔍 पथरिया की जर्जर सड़क पर सियासत: लोरमी में करोड़ों के विकास कार्य, मुंगेली मुख्यालय भी सवालों के घेरे में


%202025.jpg%20(1).jpeg)
0 टिप्पणियाँ