वॉशिंगटन डीसी। ईरान के खिलाफ लगभग दो हफ्तों से जारी युद्ध के बावजूद तेहरान में सत्ता परिवर्तन नहीं हो पाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प जल्द ही इस युद्ध में जीत का ऐलान कर सकते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि अंतिम परिणाम इस बात पर निर्भर करेगा कि ईरान आगे क्या कदम उठाता है।
अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक अगर ईरान लड़ाई जारी रखता है, समुद्री जहाजों पर हमले करता है या जवाबी कार्रवाई तेज करता है, तो यह युद्ध जल्द खत्म होता नहीं दिख रहा। रिपोर्ट में बताया गया है कि युद्ध के दौरान ईरान की नौसेना को काफी नुकसान हुआ है। उसकी कई मिसाइलें नष्ट हो चुकी हैं और कई शीर्ष सैन्य अधिकारी भी मारे गए हैं।
इसके बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के वे बड़े राजनीतिक लक्ष्य अभी तक पूरे नहीं हो पाए हैं, जिनका उन्होंने कई बार जिक्र किया था। सबसे बड़ा लक्ष्य ईरान में सत्ता परिवर्तन का था, लेकिन अभी भी वहां पुरानी सरकार ही कायम है।
होर्मुज स्ट्रेट में तनाव से वैश्विक तेल बाजार प्रभावित
ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट के पास तेल टैंकरों की आवाजाही को बाधित करके वैश्विक तेल बाजार में भी उथल-पुथल मचा दी है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक माना जाता है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर इस रास्ते पर हमले जारी रहते हैं तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है। ईरान ने यह भी दिखाया है कि वह इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाने की क्षमता रखता है।
अमेरिका के भीतर भी दिखने लगा युद्ध का असर
इस युद्ध का असर अब अमेरिका के अंदर भी दिखने लगा है। अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद देश में पेट्रोल की कीमतों में करीब 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके साथ ही किसानों के लिए खाद की कीमतें भी बढ़ गई हैं।
अमेरिकी सैनिकों की मौत का आंकड़ा भी बढ़कर 13 तक पहुंच गया है, जिससे देश के अंदर राजनीतिक दबाव बढ़ता जा रहा है। ट्रम्प की अपनी ही पार्टी के कुछ नेता अब उनसे युद्ध खत्म कर देश की अर्थव्यवस्था पर ध्यान देने की मांग कर रहे हैं।
ट्रम्प के सामने राजनीतिक चुनौती
अमेरिका में इसी साल नवंबर में मिडटर्म चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में युद्ध का लंबा खिंचना ट्रम्प के लिए राजनीतिक रूप से मुश्किल पैदा कर सकता है। हालांकि ट्रम्प लगातार यह दावा कर रहे हैं कि युद्ध की स्थिति पूरी तरह उनके नियंत्रण में है।
फॉक्स न्यूज रेडियो से बातचीत में ट्रम्प ने कहा कि युद्ध तब खत्म होगा जब उन्हें लगेगा कि अब इसे समाप्त करने का सही समय आ गया है।
परमाणु कार्यक्रम को लेकर बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि इस युद्ध के बाद ईरान के भीतर कट्टरपंथी ताकतें और मजबूत हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में ईरान परमाणु हथियार बनाने की दिशा में और तेजी से आगे बढ़ सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के पास अभी भी लगभग 440 किलोग्राम समृद्ध यूरेनियम मौजूद है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए यह एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है।
हालांकि यह भी स्पष्ट नहीं है कि हालिया हमलों के बाद ईरान अपने परमाणु ठिकानों तक कितनी आसानी से पहुंच सकता है। माना जा रहा है कि अमेरिकी हमलों के बाद वहां काफी मलबा जमा हो गया है।
एक्सपर्ट बोले- जंग से हालात और जटिल हुए
मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञ ब्रायन कातुलिस का कहना है कि इस युद्ध ने क्षेत्र की स्थिति को और ज्यादा जटिल बना दिया है। उनका मानना है कि ईरान लंबे समय से अमेरिका के लिए वैश्विक सुरक्षा से जुड़ी एक बड़ी चुनौती रहा है।
अमेरिका के कई पूर्व राष्ट्रपति भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसके क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर चिंतित रहे हैं। पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने 2015 में ईरान के साथ एक परमाणु समझौता किया था, लेकिन ट्रम्प ने 2017 में सत्ता में आने के बाद उस समझौते को खत्म कर दिया था।
होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ा खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध से पहले होर्मुज स्ट्रेट में हमलों का खतरा केवल एक रणनीतिक आशंका माना जाता था, लेकिन अब यह खतरा वास्तविक और तात्कालिक बन चुका है।
यह समुद्री रास्ता लगभग 21 मील चौड़ा है और यहीं से सऊदी अरब, इराक, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों से दुनियाभर में तेल की आपूर्ति होती है।
अगर यह रास्ता बाधित होता है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है। फिलहाल अमेरिका इस समुद्री मार्ग को पूरी तरह सुरक्षित और खुला रखने में सफल नहीं हो पाया है।
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