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DEO को हाईकोर्ट ने लगाई फटकार, ट्रांसफर मामला, शिक्षिका पदस्थापना मामले में हाईकोर्ट सख्त, डीईओ को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश
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DEO को हाईकोर्ट ने लगाई फटकार, ट्रांसफर मामला, शिक्षिका पदस्थापना मामले में हाईकोर्ट सख्त, डीईओ को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश

 DEO को हाईकोर्ट ने लगाई फटकार, ट्रांसफर मामला 


शिक्षिका पदस्थापना मामले में हाईकोर्ट सख्त, डीईओ को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश

बिलासपुर// शिक्षक युक्तियुक्तकरण के दौरान एक महिला शिक्षिका की पदस्थापना से जुड़े मामले में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने कड़ी टिप्पणी करते हुए जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने पदस्थापना आदेश को लेकर बैकडेटिंग और अदालत को गुमराह करने के प्रयास को गंभीर माना है।

मामले के अनुसार, चित्ररेखा तिवारी शासकीय कन्या माध्यमिक शाला, तारबहार में प्रधानपाठिका के पद पर पदस्थ थीं। शिक्षक युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया के तहत उनका स्थानांतरण शासकीय माध्यमिक शाला, गतौरा (विकासखंड मस्तूरी) किया गया था। हालांकि, उक्त विद्यालय में पहले से ही एक प्रधानपाठक पदस्थ होने के कारण चित्ररेखा तिवारी को पुरानी शाला में ही कार्य करना पड़ा।

स्थिति को देखते हुए शिक्षिका द्वारा प्रस्तुत अभ्यावेदन को स्वीकार किया गया और उन्हें अन्यत्र पदस्थ करने का आश्वासन दिया गया, लेकिन लंबे समय तक कोई आदेश जारी नहीं किया गया। मानसिक रूप से प्रताड़ित होकर अंततः चित्ररेखा तिवारी ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की शरण ली।

उनकी याचिका 31 जनवरी को हाईकोर्ट में पंजीबद्ध हुई। याचिका दायर होने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा एक नया पदस्थापना आदेश जारी किया गया, जिसमें शिक्षिका को शासकीय माध्यमिक शाला, फरहदा में पदस्थ दिखाया गया। सरकारी पक्ष की ओर से अदालत को बताया गया कि यह आदेश 30 जनवरी को जारी किया गया था।

हालांकि, सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने इस आदेश पर आपत्ति जताते हुए अदालत का ध्यान इस तथ्य की ओर दिलाया कि याचिका में वही केस नंबर दर्ज है, जो 31 जनवरी को पंजीबद्ध हुआ है, जबकि पदस्थापना आदेश को 30 जनवरी का बताया जा रहा है। इससे यह स्पष्ट होता है कि आदेश बैकडेट में तैयार किया गया और न्यायालय को गुमराह करने का प्रयास किया गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे को 11 फरवरी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर यह स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं कि बैकडेट आदेश क्यों जारी किया गया और उसे अदालत में क्यों प्रस्तुत किया गया।

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