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प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा सवाल: फाइलों में सुविधा, जमीनी हकीकत में समस्याओं का अंबार
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प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा सवाल: फाइलों में सुविधा, जमीनी हकीकत में समस्याओं का अंबार

प्रतिकात्मक फोटो 

मुंगेली,छत्तीसगढ़ (ग्राम पंचायत चकरभाठा)

मुंगेली जिले के ग्राम पंचायत चकरभाठा में प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक ओर जहां शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ कागजों में ग्रामीणों को मिलता दिख रहा है, वहीं जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आ रही है।

ग्रामीणों का आरोप है कि आज भी वे मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। गांव में न तो समुचित पेयजल व्यवस्था है और न ही साफ-सफाई की स्थिति संतोषजनक है। गलियों में गंदगी पसरी हुई है और नालियां बजबजा रही हैं।

🚰 जल जीवन मिशन पर सवाल:

प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा जल जीवन मिशन को क्षेत्र में सफल बताया जा रहा है और दावा किया जा रहा है कि हितग्राहियों को इसका लाभ मिल रहा है।

लेकिन जमीनी स्थिति इसके विपरीत नजर आ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि वे आज भी पेयजल की समस्या से जूझ रहे हैं और इस योजना का वास्तविक लाभ उन्हें नहीं मिल पा रहा है।

गांव में लगे कई हैंडपंप और बोरवेल खराब पड़े हैं, जिससे पानी की उपलब्धता और भी प्रभावित हो रही है। बढ़ती गर्मी के बीच यह समस्या और गंभीर होती जा रही है।

💬 ग्रामीणों की चेतावनी:

ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द समाधान की मांग की है। उनका कहना है कि यदि उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे बड़ा कदम उठाने को मजबूर होंगे।

🏛️ तहसील व्यवस्था पर भी सवाल:

सिर्फ मूलभूत सुविधाएं ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक ढांचा भी यहां सवालों के घेरे में है। ग्राम चकरभाठा को उप तहसील का दर्जा दिया गया था और इसके लिए भवन का उद्घाटन भी किया गया था। उद्घाटन कार्यक्रम में स्थानीय विधायक पुन्नूलाल मोहले ने फीता काटकर इसकी शुरुआत की थी।

लेकिन आज तक उक्त उप तहसील कार्यालय का संचालन शुरू नहीं हो पाया है। भवन में ताले लगे हुए हैं, जिसके कारण ग्रामीणों को तहसील से जुड़े कार्यों के लिए मुंगेली जाना पड़ रहा है।

🗣️ सरपंच का पक्ष:

वहीं इस पूरे मामले में ग्राम पंचायत के सरपंच का कहना है कि गांव में व्यवस्थाओं को सुधारने का कार्य जारी है और धीरे-धीरे सभी समस्याओं का समाधान कर लिया जाएगा। उन्होंने आश्वस्त किया कि आने वाले समय में पेयजल और अन्य सुविधाएं बेहतर की जाएंगी।

📢 निष्कर्ष (Conclusion):

पूरे मामले में यह स्पष्ट है कि शासन की योजनाएं कागजों में सफल दिखाई दे रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका क्रियान्वयन कमजोर है। प्रशासनिक दावों और ग्रामीणों की वास्तविक स्थिति के बीच बड़ा अंतर नजर आ रहा है, जो एक गंभीर चिंता का विषय है।


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