19 मार्च 2026/कोशलभूमि न्यूज रायपुर।
भारतीय संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिक आस्था के प्रतीक हिंदू नववर्ष के पावन अवसर पर राजधानी रायपुर पूरी तरह भगवा रंग में रंगी नजर आई। रामराज परिवार द्वारा आयोजित विशाल शोभायात्रा ने इस वर्ष भव्यता, अनुशासन और जनसहभागिता के नए आयाम स्थापित किए। अपने 17वें वर्ष में आयोजित इस शोभायात्रा ने न केवल धार्मिक आस्था को प्रदर्शित किया, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना का भी सशक्त संदेश दिया।
सप्रे मैदान से हुआ भव्य शुभारंभ
शोभायात्रा की शुरुआत सप्रे मैदान से हुई, जहां सुबह से ही श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगना शुरू हो गया था। विधि-विधान से पूजा-अर्चना के साथ भगवान श्रीराम का आह्वान किया गया और इसके बाद यात्रा का शुभारंभ हुआ।
जैसे ही शोभायात्रा आगे बढ़ी, पूरे शहर में ‘जय श्री राम’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष गूंज उठे। यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए आगे बढ़ती रही और हर जगह श्रद्धालुओं ने भव्य स्वागत किया।
भक्ति, संस्कृति और परंपरा का अनोखा संगम
इस शोभायात्रा में पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि, आकर्षक झांकियां और धार्मिक प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। झांकियों के माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन के विभिन्न प्रसंगों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसे देखने के लिए लोग सड़कों के किनारे बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
हाथों में भगवा ध्वज थामे युवा, महिलाएं और बुजुर्ग एक साथ चलते हुए रामभक्ति में सराबोर नजर आए। यह दृश्य रायपुर की सांस्कृतिक समृद्धि और धार्मिक आस्था का जीवंत उदाहरण बना।
मुख्य अतिथि किरण सिंह देव ने किया मार्गदर्शन
इस गरिमामय आयोजन में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने भगवान श्रीराम की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि हिंदू नववर्ष केवल एक तिथि नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान और गौरव का प्रतीक है। रामराज परिवार द्वारा 17 वर्षों से लगातार इस आयोजन को सफलतापूर्वक आयोजित करना समाज के लिए प्रेरणादायक है। यह आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और संस्कारों से जोड़ने का कार्य कर रहा है।
समाजसेवी कुबेर राठी की सक्रिय भागीदारी
इस आयोजन में शहर के प्रतिष्ठित समाजसेवी कुबेर राठी की उपस्थिति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। उन्होंने प्रभु श्रीराम के चरणों में शीश नवाकर आशीर्वाद लिया और श्रद्धालुओं के साथ पूरे उत्साह से शोभायात्रा में शामिल हुए।
कुबेर राठी ने इस अवसर पर नगरवासियों को हिंदू नववर्ष (विक्रम संवत) की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और सामाजिक समरसता को मजबूत बनाते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन हमें मर्यादा, सेवा और आदर्शों का मार्ग दिखाता है, जिसे अपनाना आज के समय में अत्यंत आवश्यक है।
भक्ति में लीन होकर किया नृत्य, बना आकर्षण का केंद्र
शोभायात्रा के दौरान एक भावुक और आकर्षक दृश्य तब देखने को मिला, जब माँ काली के जयकारों के बीच कुबेर राठी भक्ति में पूरी तरह लीन हो गए। वे खुद को रोक नहीं पाए और श्रद्धा भाव से नृत्य करने लगे।
उनका यह भावपूर्ण नृत्य वहां उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बन गया। लोगों ने इसे सच्ची आस्था और समर्पण का प्रतीक बताया।
शहरभर में हुआ भव्य स्वागत
शोभायात्रा के मार्ग में विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और व्यापारिक संगठनों द्वारा स्वागत मंच लगाए गए थे। जगह-जगह पुष्प वर्षा कर श्रद्धालुओं का अभिनंदन किया गया। साथ ही शीतल जल, शरबत और अन्य पेय पदार्थों की व्यवस्था कर सेवा भाव का परिचय दिया गया।
पूरे शहर में उत्सव जैसा माहौल बना रहा और हर वर्ग के लोग इस आयोजन का हिस्सा बने।
हजारों श्रद्धालुओं की रही सहभागिता
इस भव्य शोभायात्रा में हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। महिलाओं, युवाओं और बच्चों की सक्रिय भागीदारी ने आयोजन को और भी जीवंत बना दिया।
इस अवसर पर भानुप्रतापपुर विधायक सावित्री मंडावी, छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, मुख्यमंत्री के परिवार से जुड़े सदस्य, भाजपा कार्यकर्ता और रामराज समिति के सदस्यगण भी उपस्थित रहे।
सामाजिक समरसता और एकता का संदेश
आयोजन समिति के संरक्षक महेंद्र सिंघानिया ने बताया कि यह शोभायात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से लोगों में अपनी संस्कृति के प्रति गर्व की भावना जागृत होती है और समाज में भाईचारा तथा एकता को बल मिलता है।
निष्कर्ष: आस्था, उत्साह और एकता का अद्भुत संगम
हिंदू नववर्ष के अवसर पर आयोजित यह शोभायात्रा रायपुर में आस्था, उत्साह और सामाजिक एकता का अद्भुत उदाहरण बनकर सामने आई।
रामभक्ति में डूबे हजारों लोगों की भागीदारी ने यह साबित कर दिया कि हमारी सांस्कृतिक जड़ें आज भी उतनी ही मजबूत हैं और ऐसे आयोजन उन्हें और सशक्त बनाने का कार्य करते हैं।
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