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रायगढ़ में तरबूज-ककड़ी के नाम पर अफीम की खेती, झारखंड का आरोपी गिरफ्तार; 15 दिन में चौथा मामला
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रायगढ़ में तरबूज-ककड़ी के नाम पर अफीम की खेती, झारखंड का आरोपी गिरफ्तार; 15 दिन में चौथा मामला

 

🚨 रायगढ़ में अफीम की खेती का बड़ा खुलासा, एक एकड़ में तैयार फसल जब्त


छत्तीसगढ़ के Raigarh जिले से नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां पुलिस और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में करीब एक एकड़ जमीन पर उगाई जा रही अफीम की फसल का खुलासा हुआ है। खेत में फसल पूरी तरह विकसित अवस्था में थी, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह खेती लंबे समय से सुनियोजित तरीके से की जा रही थी।

इस कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है और सुरक्षा एजेंसियां अब इस मामले को एक बड़े नेटवर्क से जोड़कर देख रही हैं।

🌱 तरबूज-ककड़ी की आड़ में चल रहा था अवैध कारोबार

पूरा मामला Tamnar थाना क्षेत्र के आमाघाट इलाके का है। आरोपी ने स्थानीय किसानों से खेत यह कहकर लिया था कि वह तरबूज और ककड़ी की खेती करेगा, लेकिन जमीन पर हकीकत कुछ और ही निकली।

खेत में जब पुलिस पहुंची तो वहां अफीम के पौधे लहलहा रहे थे। यह स्पष्ट हो गया कि आरोपी ने फर्जी बहाना बनाकर जमीन हासिल की और वहां अवैध अफीम की खेती शुरू कर दी।

👤 झारखंड से आया, ससुराल में रहकर खड़ा किया नेटवर्क

जांच में सामने आया कि आरोपी Khunti जिले का रहने वाला मार्शल सांगा (40) है। उसने करीब 10 साल पहले आमाघाट निवासी सुषमा खालको से शादी की थी और उसके बाद से वह यहीं ससुराल में रहने लगा।

स्थानीय लोगों के अनुसार, वह अक्सर झारखंड और रायगढ़ के बीच आता-जाता रहता था। इसी दौरान उसने धीरे-धीरे अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर अफीम की खेती और उससे जुड़े कारोबार का नेटवर्क तैयार कर लिया।

👮 पुलिस की दबिश, एक गिरफ्तार, कई फरार

गुप्त सूचना मिलने के बाद पुलिस ने खेत और आरोपी के ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। इस दौरान मुख्य आरोपी मार्शल सांगा को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि उसके साथी भागने में सफल रहे।

giraftar aaropi 

पुलिस ने रातभर इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया और आसपास के इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। फरार आरोपियों की तलाश जारी है और जल्द ही उनकी गिरफ्तारी की उम्मीद जताई जा रही है।

📍 पांच खसरों की जमीन पर फैला था अवैध खेती का जाल

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि अफीम की खेती एक ही जगह तक सीमित नहीं थी, बल्कि पांच अलग-अलग खसरा नंबरों की जमीन पर फैली हुई थी। इसमें निजी जमीन के साथ-साथ परियोजना से जुड़ी भूमि भी शामिल थी।

इससे यह साफ संकेत मिलता है कि यह काम अकेले किसी व्यक्ति के बस की बात नहीं थी, बल्कि इसके पीछे एक संगठित और सुनियोजित नेटवर्क काम कर रहा था।

⚖️ NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज, सख्त कार्रवाई के संकेत

पुलिस ने आरोपी के खिलाफ NDPS Act के तहत मामला दर्ज कर लिया है। इस कानून के तहत दोषी पाए जाने पर कठोर सजा का प्रावधान है।

पुलिस अधीक्षक ने बताया कि जिले में “ऑपरेशन आघात” के तहत नशीले पदार्थों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है और इस तरह की गतिविधियों में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

🗣️ राजनीति गरमाई, सरकार पर गंभीर आरोप

मामले के सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति भी तेज हो गई है। T. S. Singh Deo ने इसे बेहद चिंताजनक बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है और सवाल उठाया है कि इतनी बड़ी अवैध खेती बिना प्रशासन की जानकारी के कैसे संभव है।

वहीं Bhupesh Baghel ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश में नशे का कारोबार तेजी से फैल रहा है और यह सब सरकारी संरक्षण में हो रहा है।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी यह सवाल उठाया है कि बिना किसी की जानकारी और अनुमति के इतनी बड़ी खेती संभव नहीं है, जिससे मिलीभगत की आशंका और मजबूत होती है।

⚠️ 15 दिन में चौथा मामला, बढ़ता नशे का खतरा

चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले 15 दिनों में यह चौथा मामला है, जब छत्तीसगढ़ में अफीम की अवैध खेती पकड़ी गई है।

  • दुर्ग में 5 एकड़ से अधिक क्षेत्र में अफीम की खेती
  • बलरामपुर के कुसमी में 3.67 एकड़ में फसल
  • कोरंधा में करीब ढाई एकड़ में खेती
  • और अब रायगढ़ में एक एकड़ में खुलासा

लगातार सामने आ रहे इन मामलों से यह साफ संकेत मिल रहा है कि प्रदेश में नशीले पदार्थों का नेटवर्क तेजी से फैल रहा है।

🔎 क्यों बढ़ रहे हैं ऐसे मामले?

विशेषज्ञों के अनुसार, सीमावर्ती और कम आबादी वाले इलाके इस तरह की खेती के लिए ज्यादा सुरक्षित माने जाते हैं। Jharkhand सीमा से लगे इलाकों में निगरानी कम होने का फायदा उठाकर तस्कर इस तरह की गतिविधियों को अंजाम देते हैं।

साथ ही, स्थानीय स्तर पर जमीन किराए पर लेना और नकली फसल का बहाना बनाना इस नेटवर्क की आम रणनीति बनती जा रही है।

📊 आर्थिक और सामाजिक खतरा

अफीम की खेती सिर्फ एक आपराधिक गतिविधि नहीं, बल्कि यह समाज के लिए बड़ा खतरा भी है। इससे नशे का प्रसार बढ़ता है, युवाओं पर बुरा असर पड़ता है और अवैध कमाई के जरिए अपराध का नेटवर्क मजबूत होता है।

📌 निष्कर्ष: बड़ा नेटवर्क, गहरी जांच की जरूरत

रायगढ़ का यह मामला सिर्फ एक खेत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बड़े और संगठित नेटवर्क की ओर इशारा करता है। पुलिस की कार्रवाई से एक कड़ी जरूर सामने आई है, लेकिन पूरे नेटवर्क का खुलासा होना अभी बाकी है।

ऐसे में जरूरी है कि इस मामले की गहराई से जांच की जाए और इसमें शामिल सभी लोगों पर सख्त कार्रवाई हो, ताकि प्रदेश में बढ़ते नशे के खतरे पर लगाम लगाई जा सके।

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