हाई कोर्ट ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के वेतनमान एरियर्स मामले में अहम आदेश दिया। अधिकारियों को 4 माह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश।
बिलासपुर // चतुर्थ श्रेणी (पीयन) कर्मचारियों के वेतनमान और एरियर्स से जुड़े लंबे समय से लंबित मामले में High Court of India ने एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। माननीय न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा है कि संबंधित अधिकारी कर्मचारियों के लंबित आवेदनों पर कानून के अनुसार समयबद्ध तरीके से निर्णय लें।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, याचिकाकर्ता चतुर्थ श्रेणी (Peon) वर्ग-IV के कर्मचारी हैं, जिन्हें वर्ष 2013 से 2016 तक परिवीक्षा अवधि (Probation Period) में रखा गया था। इसके बाद वर्ष 2016 से 2021-22 के बीच उन्हें वेतनमान (Pay Scale) के अनुसार मिलने वाली अंतर राशि (Arrears) का भुगतान नहीं किया गया। हालांकि, वर्ष 2021 के बाद से उन्हें संशोधित वेतनमान के अनुसार भुगतान मिलना शुरू हो गया, लेकिन पिछली अवधि का एरियर्स अब तक लंबित रहा।
विभाग को कई बार दिए आवेदन, फिर भी नहीं मिला जवाब
याचिकाकर्ताओं ने वेतनमान अंतरराशि के भुगतान के लिए संबंधित विभाग को कई बार आवेदन प्रस्तुत किए। इसके बावजूद विभागीय स्तर पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, जिससे कर्मचारी लगातार परेशान होते रहे।
हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
आखिरकार, इस मामले से परेशान होकर कुल 17 कर्मचारियों ने न्यायालय की शरण ली। याचिकाकर्ताओं ने अधिवक्ता सी.एस. चौहान के माध्यम से High Court of India में याचिका दायर की, जिसमें लंबित एरियर्स भुगतान की मांग की गई।
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| अधिवक्ता सी.एस. चौहान |
न्यायालय का क्या है आदेश?
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने प्रतिवादी अधिकारी—सहायक आयुक्त (उत्तरवादी क्रमांक 4)—को स्पष्ट निर्देश दिया कि:
- याचिकाकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत आवेदनों पर कानून के अनुसार विचार किया जाए
- मामले में उचित निर्णय लिया जाए
- यह पूरा निर्णय आवेदन प्राप्ति की तिथि से अधिकतम 4 माह के भीतर किया जाए
समयसीमा तय, कर्मचारियों को राहत की उम्मीद
न्यायालय द्वारा तय की गई समयसीमा इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है।
अब संबंधित अधिकारी को निर्धारित समय के भीतर निर्णय लेना अनिवार्य होगा, जिससे वर्षों से लंबित इस मामले में तेजी आने की उम्मीद है।
कर्मचारियों में बढ़ी उम्मीद
इस आदेश के बाद कर्मचारियों में न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।
यदि निर्णय कर्मचारियों के पक्ष में आता है, तो उन्हें 2016 से 2021-22 तक के लंबित वेतनमान एरियर्स का भुगतान मिल सकता है, जो एक बड़ी आर्थिक राहत साबित होगी।
हाई कोर्ट का यह आदेश न केवल संबंधित कर्मचारियों के लिए राहत भरा है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि सरकारी विभागों को कर्मचारियों के वैध अधिकारों पर समय पर निर्णय लेना चाहिए।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि संबंधित अधिकारी निर्धारित 4 माह की समयसीमा के भीतर क्या फैसला लेते हैं।
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