Breaking
मनखे-मनखे एक समान के जयघोष के साथ ऐतिहासिक सतनाम सद्भाव पदयात्रा का समापन
BREAKING

letest news

6/recent/ticker-posts

मनखे-मनखे एक समान के जयघोष के साथ ऐतिहासिक सतनाम सद्भाव पदयात्रा का समापन

 


रायपुर/आरंग/बलौदाबाजार/गिरौदपुरी धाम।बोल रहा है हिंदुस्तान—मनखे मनखे एक समान” के संकल्प के साथ शुरू हुई पांच दिवसीय ऐतिहासिक सतनाम सद्भाव पदयात्रा का भव्य समापन गिरौदपुरी धाम में हुआ। रायपुर के मोवा स्थित सतनाम भवन से प्रारंभ हुई इस पदयात्रा में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तथा राजागुरु धर्मगुरु गुरु बालदास साहेब की उपस्थिति में शुभारंभ किया गया था।

सतनामी समाज के गुरु एवं प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के नेतृत्व में निकली इस यात्रा ने धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया।

145 किलोमीटर की पदयात्रा, 50 से अधिक गांवों में जन-जागरण

यह पदयात्रा 145 किलोमीटर से अधिक दूरी तय करते हुए 50 से ज्यादा गांवों से होकर गुजरी। रास्ते भर श्रद्धालुओं का उत्साह देखने योग्य था। श्वेत ध्वजों और तिरंगे के साथ निकली यात्रा ने मानवता और राष्ट्रभावना का संदेश दिया।

गिरौदपुरी धाम पहुंचने पर हजारों श्रद्धालुओं ने गुरु घासीदास बाबा जी की पावन गुरु गद्दी पर मत्था टेककर आशीर्वाद लिया और विशाल जैतखाम की वंदना की। परिसर ‘सतनाम’ के जयकारों से गूंज उठा। पंथी नृत्य, मांदर की थाप और पारंपरिक अखाड़ा दलों के प्रदर्शन ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

समरसता भोज बना आकर्षण

यात्रा की विशेषता प्रतिदिन आयोजित ‘समरसता भोज’ रहा, जिसमें विभिन्न समाजों और धर्मों के लोग एक साथ बैठकर भोजन करते नजर आए। यह आयोजन बराबरी और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक बना। रात्रि विश्राम के दौरान मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने स्थानीय नागरिकों और सेवादारों का सम्मान भी किया।

मार्ग में भव्य स्वागत

पदयात्रा के दौरान कई स्थानों पर ग्रामीणों ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। गजमाला पहनाकर और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं का प्रदर्शन किया गया। इससे नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का संदेश मिला।

समाज पुनर्निर्माण का संकल्प

समापन समारोह में गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि यह यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज पुनर्निर्माण का संकल्प है। “मनखे-मनखे एक समान” का संदेश तभी सार्थक होगा, जब हर व्यक्ति को समान सम्मान मिले।

अनुशासन, भक्ति और सामाजिक एकता के संगम के रूप में यह पदयात्रा गिरौदपुरी की पावन धरती पर ऐतिहासिक अध्याय बन गई। देर तक एक ही नारा गूंजता रहा—

बोल रहा है हिंदुस्तान, मनखे-मनखे एक समान!

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ