“अहिंसा परमो धर्मः” के संदेश के साथ जैन समाज ने मनाया भगवान महावीर जन्म कल्याणक पर्व, श्रद्धा और उत्साह का अद्भुत संगम
कुनकुरी, 30 मार्च 2026। जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर के जन्म कल्याणक पर्व महावीर जयंती के पावन अवसर पर कुनकुरी नगर पूरी तरह धर्ममय और भक्तिमय वातावरण में सराबोर नजर आया। चारों ओर “जय महावीर” के उद्घोष, घंटों-घड़ियालों की गूंज और भक्ति गीतों की मधुर स्वर लहरियों ने पूरे शहर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
सुबह से ही जैन मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया था। मंदिर परिसर को आकर्षक फूलों, रंगोलियों और रोशनी से भव्य रूप से सजाया गया था। इस दौरान भगवान महावीर की प्रतिमा का विधि-विधान से अभिषेक, पूजन और शांतिधारा संपन्न हुई, जिसमें समाज के सभी वर्गों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित किया।
भव्य शोभायात्रा ने बांधा श्रद्धा का समां
धार्मिक अनुष्ठानों के पश्चात जैन मंदिर से भव्य और दिव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसने पूरे नगर को भक्तिरस में डुबो दिया। सुसज्जित रथ पर विराजमान भगवान महावीर की आकर्षक प्रतिमा श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बनी रही।
यह शोभायात्रा जैन मंदिर से प्रारंभ होकर जय स्तंभ चौक, खेल मैदान, बस स्टैंड, रेमते रोड और बाजार डांड़ जैसे प्रमुख मार्गों से होते हुए पुनः मंदिर परिसर में संपन्न हुई।
“जीओ और जीने दो” का संदेश, पुष्पवर्षा से हुआ स्वागत
पूरे मार्ग में श्रद्धालु “अहिंसा परमो धर्मः” और “जीओ और जीने दो” के संदेश के साथ भक्ति में लीन नजर आए। जगह-जगह सामाजिक संगठनों और नागरिकों द्वारा पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया गया। कई स्थानों पर जलपान एवं सेवा शिविर भी लगाए गए, जिससे सेवा और समर्पण की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
झांकियों ने दर्शाया महावीर के सिद्धांत
शोभायात्रा में शामिल आकर्षक झांकियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। इन झांकियों के माध्यम से भगवान महावीर के त्याग, तपस्या, करुणा और सत्य के सिद्धांतों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया।
इन झांकियों ने न केवल श्रद्धालुओं को भावविभोर किया, बल्कि समाज को धर्म के मूल सिद्धांतों की याद भी दिलाई।
महिलाओं और युवाओं ने बढ़ाया उत्साह
इस आयोजन में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं ने मंगल गीत गाए, वहीं युवाओं ने भक्ति संगीत पर नृत्य कर पूरे वातावरण को उल्लासमय बना दिया।
पूरे कार्यक्रम के दौरान अनुशासन, सेवा भावना और धार्मिक मर्यादा का अद्भुत समन्वय देखने को मिला।
धर्मसभा में गूंजा अहिंसा और सत्य का संदेश
आयोजन के दौरान आयोजित धर्मसभा में वक्ताओं ने भगवान महावीर के उपदेशों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज के समय में जब विश्व अशांति और संघर्षों से जूझ रहा है, ऐसे में महावीर का अहिंसा, सत्य और अपरिग्रह का संदेश मानवता के लिए अत्यंत प्रासंगिक है।
उन्होंने कहा कि “जीओ और जीने दो” का सिद्धांत सामाजिक समरसता और वैश्विक शांति की दिशा में मार्गदर्शक बन सकता है।
धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता का संदेश
आयोजकों ने बताया कि महावीर जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम और सेवा का प्रतीक है। यह पर्व हमें जीवन को सही दिशा में आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता है।
कार्यक्रम का समापन जैन मंदिर में सामूहिक आरती, मंगल पाठ और प्रसाद वितरण के साथ हुआ।
आस्था, संस्कृति और एकता का प्रतीक बना आयोजन
कुनकुरी में आयोजित यह भव्य महावीर जयंती उत्सव न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक गौरव और मानवीय मूल्यों के प्रचार-प्रसार का भी सशक्त माध्यम साबित हुआ।
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